Monday, February 25, 2019

开学前夕多地家长上阵补作业 假期作业考验家庭教育

  通宵赶完十几篇试卷、网购“写字机器人”替自己抄课文、谎称装着作业的书包被偷了……随着寒假进入尾声,许多中小学生为了作业焦头烂额。而家长们也不轻松。画手抄报、做花灯、写植物生长报告……许多家长为帮孩子完成作业使出浑身解数,引来网友吐槽“寒假作业成为了家长作业”。

  “您能帮我拍个照吗?我要帮孩子完成假期作业。”2月21日,双井富力城的中信书店,一位30多岁的男士带着女儿小心询问旁边一位女士。说罢,把顺手在书店里拿的一本《当下的启蒙》摊在桌上,跟女儿一左一右坐下,摆出“共读一本书”的样子。“摆拍”结束后,父女二人随即离开书店,前后不足3分钟。

  寒假“余额”不足,为了补作业,学生和家长都已经使出浑身解数。辽宁某小学四年级学生家长徐先生则主动承包了做手抄报和写读后感两项作业。“这些事孩子哪里会做?尤其是做小报,开学前我还专门去打印店花钱找人帮忙设计了一下。”

  西安某中学初一学生顾明(化名)为了完成“制作电子版作文集”这一作业更是“全家总动员”。姐姐负责把顾明以前写的8篇作文手打到Word里,并进行排版;爸爸负责为作文集写一篇序言;最后妈妈负责把“成品”提交到班级群里。顾明姐姐说:“这压根就是给家长布置的作业。”

  广东某小学学生家长唐女士则为了作业格式烦恼不已,比如记录过年精彩瞬间,抄写有关猪年的对联、成语,学唱当地歌谣并写下曲谱和歌词。“这些作业有的要手写,有的要打印,有的用A4纸横版,有的用竖版,还有的要配照片,大人都常常晕头转向。”因此,她先帮孩子完成大部分任务,只留出几处需要手写的地方让孩子补充。

  与上述家长相反,由于前期“欠债”过多,丰台区某小学学生豆豆最近每天都要补9页书法作业。面对孩子的超负荷作业量,豆豆妈妈并没有伸出援手:“孩子需要认识到按计划做事的重要性,权当给她一个教训了。”

  东城区某小学语文老师赵力(化名)告诉记者,其实寒假作业并不多,但还是有少数学生开学时交不上作业,也有部分家长怕孩子完不成作业被批评而选择代劳。为什么有些孩子每个假期都摆脱不了“补作业”的魔咒?为什么假期作业开始成为越来越多家长的“负担”?

  作业安排无序可能是家庭教育的疏忽

  看到孩子最近几天疯狂补作业,豆豆妈妈做了反思。她认为,这种情况一方面跟自己监督不到位有关;另一方面,孩子假期还要上补习班,留给她写作业的时间其实并不多。

  南京师范大学教育科学学院儿童发展与家庭教育研究中心副主任殷飞表示,孩子出现集中补作业的现象,有可能存在客观原因,也就是作业量大或者难度高;也可能是主观原因,即学生在假期的学习计划与学习习惯存在问题。“很多学生的家庭在假期作业的安排与执行上比较无序,不是赶就是拖。”

  为了避免这种情况,老师们想出了各种办法。放假前,徐先生收到了老师制定的假期计划表,清晰地列出了各科每天要完成的任务,并要求家长每天为孩子的完成情况打分。顾明则要每天在班级微信群打卡,通过照片、视频等汇报学习英语和锻炼身体的情况。

  但多位家长表示,要完全按照老师的要求做并不现实。“假期安排了走亲戚、旅游等计划,不想让孩子带着作业出游,所以还是积压在几天内完成的。”徐先生说。

  记者在采访中发现,家长对于寒假作业的态度会在一定程度上影响孩子的作业完成情况。部分家长认为寒假需要放松休息,作业随便写写就行,也很少对孩子进行提醒和催促。而孩子在没有外界压力的情况下总是觉得时间充裕,忍不住拖延,直到开学前才开始着急。

  殷飞提醒家长,补作业对学生的成长具有一定消极影响。首先是没能完成假期作业设计的初衷,如巩固所学知识,保持学习状态等;其次,错过了让孩子养成自主学习习惯、锻炼自律自控能力的机会。殷飞称,补作业其实是孩子家庭学习计划与落实的警示,父母如果发现孩子出现这样的问题,就要反思自己的家庭教育是不是存在疏忽与不足,及时向老师和相关专家请教。

Wednesday, February 13, 2019

केजरीवाल बोले- मोदी से न डरने वाली ममता बनर्जी को करता हूं सैल्यूट

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ एक और महारैली में विपक्षी नेता दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटे हैं. आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में ये दल विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार घेरने के लिए रैली कर रहे हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी रैली का नेतृत्व कर रही है. इस रैली में ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू समेत तमाम विपक्षी नेता जुट रहे हैं. बीजेपी के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा यहां भी पहुंचे.

मोदी जी संविधान के चीथड़े उड़ाना चाहते हैं: केजरीवाल

रैली में केजरीवाल ने कहा कि 5 साल पहले पिछली सरकार के खिलाफ आंदोलन हुआ. अब संसद के आखिरी दिन आज ये आंदोलन हो रहा है.  मोदी जी ने सीबीआई के 40 अफसर कोलकाता भेजे थे. मोदी जी ने चुनी हुई सरकार पर अतिक्रमण करने के लिए भेजा था. उस दिन अगर कोलकाता के पुलिस कमिश्नर गिरफ्तार हो जाते तो पूरे देश में संदेश जाता कि आपको राज्य सरकारों से डरने की जरूरत नहीं है, केंद्र सरकार से डरना है. मोदी जी संविधान के चीथड़े उड़ाना चाहते हैं. ममता बनर्जी को मैं सैल्यूट करना चाहता हूं. उन्होंने संविधान का साथ दिया.

ममता बोलीं, सिर्फ 20 दिन की बात है

केजरीवाल की रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि आज मोदी जी का संसद में आखिरी दिन है. एक महीने बाद आचार संहिता लग जाएगी. सिर्फ 20 दिन का मामला है. उसके बाद मोदी जो चाहें, नहीं कर पाएंगे. फिर सब कुछ चुनाव आयोग के नियंत्रण में होगा. सिर्फ 20 दिन की बात है. जो डरते हैं वह मरते हैं. जो लड़ते हैं वह जीतते हैं और कामयाब होते हैं. हम डरते नहीं हैं. हम कायर नहीं हैं, लड़ने वाले हैं.

फारूक अब्दुल्ला बोले, धर्म में भारत को नहीं बांट सकते

आप के मंच पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पहुंचे. उन्होंने कहा कि उस खून को याद करना चाहिए जो जलियावाला कांड में बहा था वो धर्म में बांटा नहीं जा सकता. ना हिन्दू का और ना मुसलमान का, ये हर हिंदुस्तानी का भारत है. फारूक ने कहा कि देश को उनसे बचाना है जो देश को तोड़ रहे हैं, लेकिन हम इनको आसानी से नहीं हटा सकते जब तक हमारे दिल साफ़ नहीं होंगे.

फारूक ने कहा कि लोग कहते हैं हम प्रधानमंत्री बनेंगे, अरे पहले आज के प्रधानमंत्री को हटाओ तब तो प्रधानमंत्री बनोगे.

पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए फारूक ने कहा कि बनिहाल से रामबन तक आजतक वो ठीक नहीं कर सके. मोदी जी कभी तो सच बोल लिया करो. मै अल्लाह के पास पहुंच जाऊंगा लेकिन तब भी वो रेल नहीं पहुंचेगी. सबको ऊपर जाना है. तब अमित शाह बचाने नहीं आएंगे. फारूक ने कहा कि हमें आपस में बांटा जा रहा है. यह लोग अगर वापस आ गए तो खुदा जाने क्या करेंगे. हमें आपस के मतभेदों को बुलाना होगा.

ममता के आने से पहले गए येचुरी-डी राजा
दिल्ली के जंतर मंतर पर आप द्वारा आयोजित 'तानाशाही हटाओ, देश बचाओ' रैली शुरू हो गई है. इस रैली को विपक्षी दल के तमाम नेता संबोधित करेंगे.विपक्षी दल के नेताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है. आरजेडी की ओर से सांसद जयप्रकाश यादव पहुंचे हैं. हालांकि बंगाल की सियासत की ताप जंतर-मंतर के मंच पर भी देखने को मिली. ममता बनर्जी के आने से पहले ही वामपंथी नेता सीताराम येचुरी और डी राजा वहां से चले गए.

बीजेपी के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मैं इस कार्यक्रम को अपना समर्थन देता हूं. 2014 में प्रचार तंत्र का इस्तेमाल किया गया. नया प्रधानमंत्री उभर कर सामने आया. क्या-क्या वायदे हुए. क्या-क्या बातें कही गईं.

आप पार्टी के दिल्ली संयोजक गोपाल राय के मुताबिक रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला और एनसीपी के प्रमुख शरद पवार हिस्सा लेंगे.

उन्होंने बताया, समाजवादी पार्टी, डीएमके, राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रीय लोक दल और अन्य पार्टियों के नेता भी महारैली को संबोधित करेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी रैली में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है.

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने बताया कि पार्टी ने उन सभी विपक्षी नेताओं को निमंत्रण भेजा है जो पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष बनर्जी की ओर से आयोजित की गई भाजपा विरोधी रैली में आए थे. सूत्रों ने बताया कि आम चुनाव में कुछ महीने ही शेष रह गए हैं, ऐसे में यह रैली भाजपा और उसके गठबंधन NDA के सहयोगियों को चुनौती देने के वास्ते एक महागठबंधन बनाने के लिए विपक्षी नेताओं को साथ लाएगी.

इससे पहले मंगलवार को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में विपक्षी दलों की एकता एक बार और देखने को मिली. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को राज्य की भाजपा सरकार ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में शामिल होने से रोक दिया. इस मामले को समाजवादी पार्टी ने जोरशोर से उठाया. इसकी गूंज संसद में भी सुनाई दी और देशभर के विपक्षी दलों के नेताओं ने भाजपा सरकार के इस कदम की निंदा की.

इससे पहले, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के दिल्ली में एक दिवसीय अनशन और उससे पहले ममता बनर्जी के केंद्र सरकार के खिलाफ धरने में भी विपक्षी नेताओं की एकजुटता देखने को मिली थी.

Wednesday, February 6, 2019

दुनिया के किस देश में लोग सबसे ज़्यादा गोश्त खाते हैं?

हाल के कुछ दिनों में आपने सोशल मीडिया से लेकर निजी बातचीत में लोगों को ये कहते सुना होगा कि वे मांस खाना कम करने जा रहे हैं या पूरी तरह से बंद करने जा रहे हैं.

ये बाते कहते हुए लोग अपनी सेहत सुधारने के मकसद से लेकर पर्यावरण और जानवरों के हित की बात करते हैं.

अगर ब्रिटेन की बात की जाए तो एक तिहाई ब्रितानी नागरिक दावा करते हैं कि उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया है या कम कर दिया है.

वहीं, अमरीका में दो तिहाई लोग दावा करते हैं कि वो पहले से कम मांस खा रहे हैं.

लोगों की सोच में दिख रहे इस बदलाव का आंशिक श्रेय मांसाहार के ख़िलाफ़ चलाए जाने वाले अभियानों जैसे मीट-फ्री मंडे या वेगनरी को दिया जाना चाहिए.

इसके साथ ही इसी समय पर कई डॉक्यूमेंट्रीज़ और शाकाहार के प्रभावशाली पक्षधरों ने कम मांस खाने के फायदों को लोगों के सामने रखा है.

लेकिन क्या इसका मांस की ख़पत पर कोई असर पड़ रहा है?

बढ़ती हुई तनख़्वाहें
हम ये जानते हैं कि वैश्विक स्तर पर मांसाहार की खपत में बीते पचास सालों में तेजी से इज़ाफा हुआ है.

इसके साथ ही साल 1960 के मुक़ाबले मांस का उत्पादान पांच गुना बढ़ा है.

साल 1960 में मांस का उत्पादन 70 मिलियन टन था जो कि 2017 तक 330 टन तक पहुंच गया है.

खपत में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह आबादी में बढ़ोतरी होना है.

इस दौरान दुनिया की आबादी में दोगुने से भी ज़्यादा बढ़त हुई है.

1960 की शुरुआत में वैश्विक जनसंख्या लगभग तीन अरब थी जबकि इस समय दुनिया की आबादी 7.6 अरब है.

हालांकि, ऐसा नहीं है कि मांस की खपत बढ़ने के लिए जनसंख्या में वृद्धि ही ज़िम्मेदार है, मांस के उत्पादन में पांच गुना वृद्धि जनसंख्या की बढ़त की वजह से ही नहीं हुई है.

इसके लिए लोगों की सैलरी में बढ़ोत्तरी भी ज़िम्मेदार है.

दुनिया भर में लोग अमीर हो रहे हैं. सिर्फ पचास सालों में ही वैश्विक आय तिगुनी हो गई है.

जब हम दुनिया के अलग-अलग देशों में मांस की खपत का अध्ययन करते हैं तो पता चलता है कि जिन देशों में लोग ज़्यादा समृद्ध हैं वहां पर मांस की खपत भी ज़्यादा है.

इसका मतलब ये है कि दुनिया में सिर्फ लोग ही ज़्यादा नहीं हैं. बल्कि दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या ज़्यादा है जो कि मांस खाने पर खर्च करने में सक्षम हैं.

दुनिया में मांस की खपत पर नज़र डालें तो समृद्धि और मांस की खपत का सीधा संबंध नज़र आता है.

इस बारे में सबसे हालिया आंकड़ा साल 2013 का है.

इसके मुताबिक़ अमरीका और ऑस्ट्रेलिया ने वार्षिक मांस की खपत के लिहाज़ से सबसे ऊंचा पायदान हासिल किया था.

वहीं, न्यूजीलैंड और अर्जेंटीना ने प्रतिव्यक्ति 100 किलोग्राम मांस की खपत के हिसाब से सबसे ऊंचा स्थान हासिल किया था.

दरअसल, पश्चिमी देशों में, ख़ासकर पश्चिमी यूरोप के ज़्यादातर देशों में प्रति व्यक्ति वार्षिक मांस की खपत 80 से 90 किलोग्राम है.

वहीं, दुनिया के ग़रीब देशों में मांस की खपत बेहद कम है.

एक औसत इथियोपियन व्यक्ति मात्र सात किलोग्राम मांस खाता है.

वहीं, रवांडा और नाइजीरिया में रहने वाले लोग आठ से नौ किलोग्राम मांस खाते हैं.

ये आंकड़ा किसी भी औसत यूरोपीय व्यक्ति की तुलना में 10 गुना कम है.

कम आय वाले देशों में मांस खाना अभी भी विलासिता का प्रतीक माना जाता है.

ये आंकड़े बताते हैं कि प्रति व्यक्ति के स्तर पर कितना मांस उपलब्ध है. लेकिन ये आंकड़े घर और दुकानों में बर्बाद होने वाले मांस को शामिल नहीं करते हैं.

लेकिन असल बात ये है कि लोग इससे कम मात्रा में मांस खाते हैं. लेकिन ये करीब-करीब ठीक आंकड़ा है.

Monday, February 4, 2019

बंगाल विवाद पर बोले हरियाणा के मंत्री अनिल विजः ताड़का जैसा काम कर रही हैं ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है. बंगाल में चिटफंड केस को लेकर सीबीआई जांच और पुलिस में जारी तकरार के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कूद गई हैं, उनके समर्थन में विपक्ष एकजुट हो रहा है तो बीजेपी के कई बड़े नेता ममता बनर्जी पर हमला करने लगे हैं. हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने उनकी तुलना ताड़का से कर डाली.

शारदा चिट फंड में जांच में ममता बनर्जी के बाधा डालने के आरोप में हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने रविवार को उनकी तुलना ताड़का से करते हुए कहा कि छोटे होते थे, जब रामलीला देखने जाया करते थे तो उसमें एक सीन आया करता था कि ऋषि-मुनि जब यज्ञ किया करते थे तो ताड़का उसमें व्यवधान डाल दिया करती थी, ठीक उसी प्रकार का रोल ममता बनर्जी कर रही है.

उन्होंने आगे कहा कि चाहे योगी आदित्यनाथ की रैली हो, चाहे अमित शाह यात्रा निकालना चाहे तो उसमें रुकावट डालती है, कभी किसी का हेलिकॉप्टर रोकती है, इसीलिए पूरी तरह से ममता बनर्जी वही कर रही है जो ताड़का किया करती थी.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि हम सभी को भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होना चाहिए. वहीं पश्चिम बंगाल के हालात पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र को तार-तार किया जा रहा है. संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. वहां की मुख्यमंत्री ने एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा किया है.

उन्होंने आगे कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शारदा चिटफंड घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है और यह आज की नहीं बल्कि 2014 से पहले की है. जांच पूरी होने पर किस के फंसने का डर है. जांच में सहयोग क्यों नहीं किया जा रहा है और यह नहीं होने देना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है. इसके जरिए देश की संघीय ढांचे को नष्ट करने की कोशिश की जा रही हैं.

शिवराज चौहान ने आगे कहा कि सच बात यह है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती हुई लोकप्रियता से घबराकर बीजेपी के नेताओं की सभाएं रोकी जा रही हैं. हेलिकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं दी जा रही और कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही जिसे कभी भी जायज नहीं ठहराया जा सकता. पश्चिम बंगाल में अब टीएमसी का जाना तय है.

वहीं बंगाल मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और विजय गोयल का कहना है कि केंद्र का सीबीआई के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं है. ममता बनर्जी नाटक कर रही हैं सीबीआई अपना काम कर रही है जिसे रोकने की कोशिश की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही सीबीआई कोलकाता में जांच के लिए गई थी. लेकिन ममता अपना वजूद और जनता में आधार खो रही हैं इसलिए वह बौखलाई हुई हैं.

Friday, February 1, 2019

महागठबंधन पर संकट, राजू शेट्टी ने चार सीटों की मांग को लेकर दिया फाइनल अल्टीमेटम

राज्य में लोकसभा चुनावों के लिए महागठबंधन बनने से पहले ही उस पर संकट के बादल छाते हुए नजर आ रहे हैं। राज्य में कांग्रेस-एनसीपी समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट कर महागठबंधन बनाने में जुटी है। वहीं, दूसरी तरफ प्रकाश अंबेडकर और समाजवादी पार्टी के बाद अब राजू शेट्टी ने भी महागठबंधन से अलग होने के चेतावनी दी है।

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी लोकसभा में 1 सीट चाहते हैं। आजमी ने मांग पूरी न होने पर सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। वहीं, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी भी एनडीए का साथ छोड़ कांग्रेस- एनसीपी के साथ आ गए हैं। राजू शेट्टी 4 सीटों से कम पर समझौते के लिए तैयार नहीं है।

शेट्टी ने कहा कि हमें हातकणंगले, मढ़ा, वर्धा व बुलढाणा की लोकसभा सीट चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुवार से शुरू संसद का बजट सत्र की समाप्ति तक कांग्रेस के जवाब का इंतजार करेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति तय करेंगे।

भारतरत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि अगर कांग्रेस-एनसीपी 12 सीट देती है तो महागठबंधन में शामिल होंगे, अन्यथा ओवैसी की पार्टी के साथ उनका समझौता हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस महागठबंधन से अलग होकर छोटे दल, अलग तीसरा मोर्चा खड़ा कर सकते हैं। यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा।

राज ठाकरे से मिले अहमद पटेल

शरद पवार, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को महागठबंधन में लेना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस तैयार नहीं। कांग्रेस को डर है कि राज को साथ लिया तो उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे अन्य हिंदी भाषी राज्यों में उन्हें जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। राज ठाकरे के बेटे अमित की शादी में राहुल गांधी की तरफ से अहमद पटेल पहुंचे थे। सूत्रों का कहना है कि शादी के दौरान ही करीब 20 मिनट तक राज ठाकरे और अहमद पटेल के बीच बंद कमरे में चर्चा हुई।

प्रदेश में सपाक्स पार्टी 14 सीटों पर लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी उतारेगी। शेष सीटों पर समर्थक दलों के प्रत्याशी उतरेंगे। पार्टी फरवरी के अंत में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर देगी। प्रत्याशियों के नामों की स्क्रूटनी शुरू कर दी गई है।

सपाक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने बताया कि 29 सीटों में से 14 सीटों पर पार्टी प्रत्याशी उतारेगी। फोकस पांच सीटों पर रहेगा। इनमें इंदौर, मंदसौर, रीवा, सतना और जबलपुर सीटें शामिल हैं। पार्टी उन सीटों पर ताकत लगाएगी जहां सामान्य और पिछड़े वर्ग के वोटर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन
त्रिवेदी ने बताया कि समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन किया गया है। इसके लिए चर्चा चल रही है कि किस लोकसभा सीट पर किस दल का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। इस बार दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में भी सपाक्स के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। अन्य प्रदेशों में भी लोगों का समर्थन मिल रहा है।

بالضحك والسخرية: كيف ساهمت الكوميديا في التخفيف من ضغوط فيروس كورونا؟

ربما تتلخص العلاقة الأزلية بين كوميدية وتراجيدية الحياة في إحدى المقولات ائيس الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع الأمريكي، مايك بنس، بزي...